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Mahanarayan Tel

Very useful in simple Arthritis, joints pain, Hemiplegia, Muscular pains etc

महानारायण तेल

घटकद्रव्यः रास्ना, अश्वगंधा, सौंप!, देवदार!,कुठ, शालपर्णी, अगर, नागरमोथा,

तेजपान, सेंधानमक, छोटी ईलायची, मंजिष्ठा, मुलेठी, तगर,नागरमोथा, तेजपान, भांगरा,

सुगंधवाला ;खसद्ध, वच, पलसमुल, पुर्ननवामुल, चोरपुष्पी, सोनपाठा, सतावरी इत्यादी.

उपयोगः इस तेल की मालीश करने से पसिने की दुर्गंधी शिघ्र नष्ट हो जाती है। सभी

प्रकार के वातरोग को शिघ्र नष्ट करने मदत करता है। वातव्याधी विशेषतः एकांग वात,

अर्दित और हस्त पादादिकम्पन, पंगु, वधिर्य, शुव्र!क्षय, मन्यास्तंभ, हनुस्तंग और

शिरसुल आदि रोगो मे उपयोगी है। शाखाश्रितवात, कोष्टगतवात, जिव्हास्तंभ,

दंतशुल, उन्माद, कुबडापन, के लिए उत्तम है। इस तेल से

वृध्दावस्था मे लाभ होकर शक्ति संपन्न होता है।

SUNTH SUDDHA CASTOR OIL

सुंठ सिध्द एरंड तेल

घटकद्रव्यः शुध्द एरंड तेल व सुंठ

उपयोगः त्वचा के लिए हितकारक, मेधा कान्ती तथा बल देणे वाला, वात, कटीग्रह

;कमर का जकडनाद्ध

गुणधर्मः विरेचक, अर्श विकार, गुदा विकार, उदरगल, शोथ आदि समस्याओं के लिए

उत्तम.

प्रमाणः विरेचनः 2 से 5 चम्मच अनुपातः गरम पानी, चाय, कॉफी , सुबह खाली पेट

आमवातः 1 से 2 चम्मच दिन मे 3 बार आंजन के लियेः 1 से 2 बुंद प्रत्येक आॅख मे

Rasraj vatnasak Tel

The active content of this product is til oil, gokhru, ambihaldhi, nirangudi, raktachandan, dhaniya(corriender), satavari, and other. Vatnasak tel is effective and give releaf in rheumatoid arthritis, back pain, joint pain and other bone problem.

रसराज वातनाशक तेल

घटकद्रव्यः गोखर!, आंबी हलदी, निरगुडी लहसुन, कायफाल, चिकना मुल,

रक्तचंदन, नेपाली धनियाॅ, कपुर, सतावरी, अश्वगंधा,धतुरा एवं तिल तेल.

उपयोगः यह तेल से मालीश करने से मर्दन,वात रोग को नष्ट करता है। यह

84 प्रकार केवात रोगों को नष्ट करता है। यह तेल

वात व्याधी के लिए अति उत्तम है। गठीयावात,संधीवात, कटीकुल, सुजन

वातप्रकोप और वात इत्यादी में रसराज वातनाशक तेल अत्यंत लाभदायक है।

उपयोग की विधीः हलका गरम करके तेल से मालीश कर तथा उपर

से कपडा बांधने से बहुत आराम मिलता है।

NARAYAN TEL

नारायण तेल

घटकद्रव्यः अश्वगंधा, खरेटी की जडी, बेल की जड, छोटी कटेरी, गोखर!, संभालु

की पत्ती, सोनापाठा के मुल, पुर्णनवा के मुल, उडद, कटरसैया एरंड मुल, देवदार!,

प्रसारणी और अरणी, कुठ, छोटी ईलायची, सप!ेद चंदन, खरेटी मुल, जटामारसी,

छरीला, सेंधा नमक, असगंध, बच, रासना, सौंप! सरिवन, पिठवन, माष्परणी,

मृद्गणपर्णी, तगर, शतावरी रस, गाय का दुध 1 तिल तेल फण्ण्

उपयोगः लकवा, पक्षाघात, आदि वायु के कारण शरीर का एक भाग सुख जाता है।

वहा रक्त का संचार न होने के कारण वह भाग शुन्य और पतला हो जाता है।

एैसी स्थिती मे नारायण तेल की मालीश से बहुत लाभ होता है। पक्षाघात, मन्यास्तंभ,

कमर का दर्द पसली का दर्द , कान का दर्द, लंगडापन, एकांग या सर्वांग

वात में ज्यादा दर्द में सुबह शाम नारायण तेल लगाकर सेक ले। पुराने

वात रोगों में उस तेल की मालीश से लाभ होता है।

उपयोग विधीःनारायण तेल दर्द वाले हिस्सेपर लगाकर सेंक ले।

MAHAMASH TEL

महामाष तेल ;निरामिषद्ध

घटकद्रव्यः मंजिष्ठा, हिरडा, अश्वगंधा, कचुर, देवदार!,

खरेटी, रास्ना, प्रसारणी, कुठ, प!ालसा, भारंगी,

विदारीकन्द, क्षिरविदारीकन्द, पुनर्नवा, शतावरी, विजारा,

नींबु, सफेद जीरा, साहजीरा, हींग, सौंप!, गोखर! पीपरामुल,

सेंधा नमक, गुलेठी, जिवंती, दसमुल, मास्कक्वाथ, दुध,

तिल तेल फण्ण.

उपयोगः पक्षाघात, पंगुता, सिर का जकडना, गदैन का जकडना,

शुक्रतन्य, कर्णनाद, पुराने वात रोगो मे और वात प्रकृतिवाले

वातरोगो मे यह बहुत गुणकारी है। इस तेल की मालीश के साथ

महारास्नादी क्वाथ के साथ बृहत योगराज गुगुल सुबह-शाम

सेवन करते रहे और बादी या कफवर्धक अथवा दस्तकब्ज करने

वाले पदार्थ का परहेज रखे तो पुराने वातरोग मे आराम दिलाने मे मदत

करता है।

उपयोग विधीः महामाष तेल से दर्द वाले हिससेपर लगाकर

हलके हाथो से मालीश करें।

KISHAN RAVI PREMIUM GLAB JAL

किसान रवि प्रिमियम गुलाब जल

घटकद्रव्यःशुध्द जल, गुलाब आॅईल

उपयोगः गुलाब जल एक प्राकृतिक सौंदर्य प्रसाधन है। गुलाब जल कई तरह की त्वचा

संबंधी समस्याआंे मे प!ायदेमंद होता है।

SUDDHA MUSTARD OIL

शुध्द सरसो तेल

घटकद्रव्यःशुध्द सरसो तेल

उपयोगः सिर तथा कान संबंधी रोग, खुजली, कुष्ट, कोष्ट में उपयोगी ।

SUDDHA LINSEED OIL

शुध्द जवस ;अलसीद्ध तेल

घटकद्रव्यःशुध्द जवस ;अलसीद्ध तेल

उपयोगः माालिश करने मे एवं नस्य बलकारक, वातनाशक, त्वचागत, रोंगो को दुर

करने मे सहायक, कान में डालने के लिए, हड्डीयो को मजबुत करने में मद्द, चोट,

मोच, सुजन, में अत्यंत लाभदायक ।

SUDDHA KARANJA OIL

शुध्द करंज तेल

घटकद्रव्यःशुध्द करंज तेल

उपयोगः आतवात, कर्णस्त्राव, दृष्टव्रन, चेहरे के दाग के उपर लगाया जाता है ।

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